अडानी समूह से जुड़ी कंपनी ने लगाई सबसे ऊंची बोली, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों को लेकर उठे सवाल
(डॉ. सुनील पलस्कर द्वारा)
अंबिकापुर/सूरजपुर। देश के समृद्ध वन क्षेत्रों में शामिल हसदेव अरण्य एक बार फिर कोयला खनन को लेकर चर्चा के केंद्र में है। हसदेव क्षेत्र के तारा (रिवाइज्ड) कोल ब्लॉक की नीलामी में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड ने 37.50 प्रतिशत की सर्वाधिक राजस्व हिस्सेदारी वाली बोली लगाकर ब्लॉक हासिल किया है। कंपनी को अडानी समूह से जुड़ी कंपनी बताया जा रहा है। नीलामी के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे कॉरपोरेट खनन हितों के प्रभाव में जा रहा है। विरोधी इसे प्रतीकात्मक रूप से राज्य के ‘अडानीगढ़’ बनने की दिशा में एक और कदम बता रहे हैं।
तारा कोल ब्लॉक को मार्च 2023 में व्यावसायिक कोयला खदानों की सातवें दौर की नीलामी में शामिल किया गया था। उस समय छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरणीय कारणों का हवाला देते हुए तारा सहित नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने की मांग केंद्र सरकार से की थी। राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इन क्षेत्रों में खनन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका जताई थी। इसके बाद जुलाई 2023 में केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा कोल ब्लॉक को उस नीलामी प्रक्रिया से वापस ले लिया था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तारा कोल ब्लॉक सूरजपुर जिले के हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित है और इसके बड़े हिस्से पर घना जंगल मौजूद है। वर्ष 2023 की रिपोर्टों में ब्लॉक क्षेत्र का करीब 81 प्रतिशत हिस्सा वनाच्छादित तथा लगभग 15.96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अत्यंत घने वन की श्रेणी में बताया गया था। यही कारण है कि पर्यावरणविद लंबे समय से इस क्षेत्र को खनन से सुरक्षित रखने की मांग करते रहे हैं।
तारा कोल ब्लॉक को दोबारा नीलामी में शामिल किए जाने और उसका सफल बोलीदाता घोषित होने से स्थानीय ग्रामीणों तथा हसदेव बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि खनन शुरू होने पर जंगल, जैव विविधता, जलस्रोत और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकते हैं। आदिवासी समुदायों की आजीविका मुख्य रूप से जंगल, कृषि और लघु वनोपज पर निर्भर है। इसलिए खनन परियोजना का असर उनके जीवन, संस्कृति और पारंपरिक अधिकारों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा ने जुलाई 2022 में हसदेव अरण्य क्षेत्र में खनन का विरोध करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। इसके बावजूद तारा ब्लॉक को दोबारा नीलामी में शामिल किए जाने से केंद्र और राज्य की पर्यावरण नीति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
हालांकि, केवल नीलामी में ब्लॉक मिलने से तत्काल पेड़ों की कटाई या खनन शुरू नहीं हो जाता। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए पर्यावरण स्वीकृति, वन भूमि डायवर्जन, ग्रामसभा से संबंधित प्रक्रियाओं तथा अन्य वैधानिक अनुमतियों को पूरा करना आवश्यक होगा। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि संबंधित सरकारें और विभाग हसदेव के पर्यावरण, स्थानीय समुदायों के अधिकार तथा औद्योगिक विकास के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करते हैं।






